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2024 में सबसे कम सीटों पर चुनाव लड़ेगी कांग्रेस, अपनों ने ही दिखाया ‘बाहर’ का रास्ता, वहज-‘पप्पू’?

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Congress will contest elections on least number of seats after independence
बिलासपुर:

लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच शह-मात का खेल शुरू हो गया है. बीजेपी तबड़तोड़ बैठकें करके सत्ता की हैट्रिक लगाने की जुगत में है तो कांग्रेस के सामने अपने सियासी वजूद को बचाए रखने चुनौती है. यही वजह है कि कांग्रेस ने विपक्षी दलों के साथ मिलकर INDIA का गठन कर रखा है और सीट शेयरिंग को लेकर हर समझौता करने के लिए तैयार है. ऐसे में कांग्रेस को अपने सियासी इतिहास से सबसे कम सीटों पर 2024 के चुनाव में उतरना पड़ सकता है. INDIA गठबंधन में शामिल छत्रप अपने-अपने राज्य में कांग्रेस के लिए बहुत ज्यादा सीटें देने के मूड में नहीं दिख रहे है. यही वजह है कि कांग्रेस को बिहार से लेकर यूपी, दिल्ली और पश्चिम बंगाल तक ‘जहर का घूंट पीकर’ सीटों पर समझौते करने पड़ रहे हैं. देखना है कि कांग्रेस सारे समझौता करने के बाद 2024 में क्या हासिल कर पाती है?

आजादी के बाद पहली बार 1952 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने कुल 499 में से 489 सीटों पर चुनाव लड़कर 364 सीटें जीतने में कामयाब रही थी. साल 1957 में कांग्रेस ने 494 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और 371 सीटें जीतीं. 1962 में कांग्रेस 494 और 1967 में 523 सीट पर चुनाव लड़ी. 1971 में कांग्रेस 518 सीटों में से 352 सीटें जीती. आपातकाल के बाद 1977 में कांग्रेस सभी 542 सीटें में से 154 सीटें ही जीत सकी. पांच साल के बाद 1980 में कांग्रेस 353 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की थी. साल 1984 में कांग्रेस 542 सीटों में से 404 सीटें जीतकर कांग्रेस को ने इतिहास रच दिया और पंजाब में कांग्रेस की जीत से यह आंकड़ा 413 सीटों पर पहुंच गया, जहां चुनाव कुछ महीने बाद हुए थे.

‘पप्पू’ के बाद गिर रहा ग्राफ

1989 के लोकसभा चुनाव के बाद से कांग्रेस का ग्राफ नीचे गिरना शुरू हुआ तो फिर लगातार जारी रहा. 1991 लोकसभा चुनाव के दौरान राजीव गांधी की दुखद हत्या के बाद कांग्रेस ने 244 सीटें जीतीं और छोटी पार्टियों के बाहरी समर्थन से पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व में सरकार बनाई. इसके बाद 1996 के चुनाव में कांग्रेस 140 सीटों पर सिमट गई. 1998 में कांग्रेस का सियासी ग्राफ और भी कम हो गया, अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा ने एनडीए की सरकार बनाई. 1998 में कांग्रेस 141 सीटें और बीजेपी को 182 सीटें मिली थीं.

साल 1999 चुनाव में कांग्रेस 114 सीट पर रुक गई. कांग्रेस 1999 के लोकसभा चुनाव में 453 सीटों पर अपने कैंडिडेट्स उतारे थे, जिनमें से 114 सीटें ही जीत सकी. इसके बाद 2004 चुनाव में कांग्रेस 417 सीटों पर लड़ी थी जिसमें से 145 जीतने में कामयाह रही थी. उसी तरह 2009 में कांग्रेस ने 440 सीटों पर चुनाव लड़ा और 206 सीटों पर जीत. 2014 से लेकर 2014 तक कांग्रेस सत्ता में रही. 2014 में कांग्रेस 464 सीटों पर लड़ी और सिर्फ 44 ही जीत पाई थी. 2019 के चुनाव में कांग्रेस 421 सीटों पर लड़ी और 52 पर जीती. इसके विपरीत बीजेपी पिछले पांच चुनाव में क्रमश: 339, 364, 433, 428 और 436 सीटों पर चुनाव लड़ी है.

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2004 में 417 सीटों पर लड़ी थी

कांग्रेस अपने सियासी इतिहास में अभी तक सबसे कम सीटों पर 2004 के लोकसभा चुनाव में लड़ी है. 2004 में कांग्रेस ने 417 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, क्योंकि बाकी सीटें गठबंधन के सहयोगियों के लिए छोड़ी थी. कांग्रेस ने महाराष्ट्र में एनसीपी, बिहार में आरजेडी, झारखंड में जेएमएम, तमिलनाडु में डीएमके जैसे दलों के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ी थी. कांग्रेस देश की कुल 543 लोकसभा सीटों में से 417 पर खुद लड़ी थी और बाकी 126 सीटें पर उसके सहयोगी दल लड़े थे. 2014 और 2019 लोकसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस के लिए 2024 का चुनाव कोर या मरो वाली स्थिति का है. इसीलिए कांग्रेस हर समझौता करने के लिए तैयार है. यही वजह है कि आजादी के बाद कांग्रेस को अपने सियासी इतिहास में सबसे कम सीटों पर इस बारह चुनाव लड़ने की संभावना दिख रही है.

दरअसल, नरेंद्र मोदी के केंद्रीय राजनीति में दस्तक देने के साथ ही कांग्रेस पूरी तरफ से कमजोर हो गई है. कांग्रेस के हाथों से देश की ही सत्ता नहीं बल्कि राज्यों से भी बाहर होती जा रही है. ऐसे में कांग्रेस देश के तीन राज्यों में अपने दम पर सरकार में है और तीन राज्यों में सहयोगी दल के साथ सत्ता में भागेदारी बनी हुई है. कांग्रेस पार्टी की कमान गांधी परिवार से बाहर मल्लिकार्जुन खरगे को सौंपी गई और 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए 27 विपक्षी दलों के साथ मिलकर गठबंधन किया ताकि बीजेपी को मात दी सके. इसके लिए कांग्रेस ने ममता बनर्जी से लेकर अखिलेश यादव, नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव, उद्धव ठाकरे, एमके स्टालिन, जयंत चौधरी, शरद पवार की पार्टियों के साथ-साथ लेफ्ट पार्टी के साथ हाथ मिलाया है.

कांग्रेस ने INDIA गठबंधन के छत्रपों के साथ सीट शेयरिंग के लिए कांग्रेस ने मुकुल वासनिक के अगुवाई में अपने नेताओं पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है. मुकुल वासनिक के आवास पर बैठक कर समिति के सदस्यों ने 543 लोकसभा सीटों में से कम से कम साढ़े तीन सौ सीटों पर चुनाव लड़ने की रूप रेखा बनाई है, जिसे गठबंधन के सहयोगी दलों के सामने रखेगी. सूत्रों की माने तो इस पैनल ने 292 लोकसभा सीटों को शॉर्टलिस्ट किया है, जहां पर खुद चुनाव लड़ना चाहती है. इसके अलावा सहयोगी दलों के प्रभाव वाले राज्यों में 80 से 85 सीटें चाहती है. हालांकि, कांग्रेस जिस तरह से सीटों का चयन किया है, उस लिहाज से 370 से ज्यादा सीटें उसके रॉडार पर है, लेकिन सहयोगी दल उसे इतनी सीटें देने के मूड में नहीं है. ऐसे में कांग्रेस को ज्यादा से ज्यादा 270 सीटों पर ही चुनाव लड़ने आजादी मिल सकती है. ऐसे होता है कि कांग्रेस बहुमत से भी कम सीटों पर चुनाव लड़ना पड़ सकता है?

कांग्रेस के रणनीतिकारों के अनुसार गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान और उत्तराखंड जैसे नौ बड़े राज्य, जिनमें 152 लोकसभा सीटें हैं, उन पर भाजपा और कांग्रेस की सीधी टक्कर है. इन प्रदेशों की सीटों पर कोई दूसरी पार्टी कांग्रेस को मदद नहीं कर सकती है. वहीं, विपक्षी पार्टियों के साथ आने के कारण जिन राज्यों में बीजेपी को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है, वे राज्य हैं- असम, हरियाणा, कर्नाटक, झारखंड और पश्चिम बंगाल हैं, क्योंकि ऐसी स्थिति में यहां भाजपा विरोधी मतों का विभाजन नहीं होगा.

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दिल्ली में जहां भाजपा का सातों सीटों पर कब्जा है, इस बात पर सहमति बन सकती है कि आम आदमी पार्टी पांच सीटों पर लड़े और बाकी दो सीटें कांग्रेस मिल सकती है. इसी तरह पंजाब में कांग्रेस कुल 13 सीटों में से 6 सीटों पर ही अपने कैंडिडेट्स उतार सकती है और बाकी सात सीटें आम आदमी पार्टी को मिल सकती है. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस 21 सीटों की मांग सपा के सामने रख सकती है, लेकिन अखिलेश यादव सिर्फ 10 से 12 सीटें ही देने के मूड में है. इसी तरह से बिहार में कांग्रेस 9 से 10 सीटें मांग रही है, लेकिन उसे ज्यादा से ज्यादा पांच सीटें ही मिल सकती हैं. झारखंड में कांग्रेस को 3 सीटें ही जेएमम देने के मूड में है जबकि उसकी डिमांड पांच सीटों की है. महाराष्ट्र में कांग्रेस 22 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है, लेकिन उसे 12 से 15 सीटें ही मिल सकती है. बंगाल में ममता बनर्जी बहुत ज्यादा कांग्रेस को सियासी स्पेश नहीं देना चाहती है, जिसके चलते उसे चार से पांच सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है.

क्या 272 से कम सीटों पर लड़ेगी कांग्रेस?

इस तरह कांग्रेस 272 से कम लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ना पड़ सकता है. ऐसे में 2024 में कांग्रेस जिन लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है, उन सभी पर अगर उसे जीत हासिल हो, तब भी वह अपने दम पर केंद्र में सरकार नहीं बना सकती, क्योंकि बहुमत से कम सीटों पर ही चुनाव लड़ रही है. राहुल गांधी 14 जनवरी को जिस भारत न्याय यात्रा पर निकल रहे हैं, उन राज्यों की 355 संसदीय सीटें ही आती है और कांग्रेस के सिर्फ 14 सीटें है. ये ऐसे राज्य हैं, जहां पर छत्रपों का ही पूरी तरह दबदबा है. ऐसे में कांग्रेस को जहर का घूंट पीकर ही सीटों के लिए समझौता करना पड़ेगा और उसे अपने इतिहास में सबसे कम सीटों पर चुनाव लड़ना होगा?

मैं आपको इस ताज़ा जानकारी के बारे में बताना चाहता हूँ कि लोकसभा चुनावों के संदर्भ में कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों के बीच जो माहौल बन रहा है, वह काफी रोमांचक है। बीजेपी सत्ता में एक बार फिर से हावी होने की कोशिश कर रही है, जबकि कांग्रेस अपने स्थान को बचाने की चुनौती में है। इसी कारण, कांग्रेस ने विपक्षी दलों के साथ मिलकर ‘INDIA’ नामक गठबंधन का गठन किया है और सीटों का बंटवारा करने के लिए तैयारी की है। इस दौरान, कांग्रेस को 2024 के चुनाव में अपने राजनीतिक इतिहास में सबसे कम सीटों पर चुनाव लड़ना पड़ सकता है। ‘INDIA’ गठबंधन में शामिल दलों के सामर्थ्य के कारण, कांग्रेस को बिहार से लेकर यूपी, दिल्ली और पश्चिम बंगाल तक समझौते करने पड़ सकते हैं। क्या कांग्रेस को इस समय अपने रूट्स से भी कम सीटों पर चुनाव लड़ना पड़ेगा? इसका अंत देखने के लिए हम सब को धीरज रखना होगा।
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प्रधानमंत्री मोदी ने कैबिनेट मंत्रियों से मांगा 100 दिन का प्लान, 3 मार्च तक का दिया समय

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विपक्षी पार्टियां जहां लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन बनाने में ही जुटे हुए हैं, वहीं भाजपा अपनी जीत को लेकर इतनी आश्वस्त है कि पीएम मोदी ने अपने कैबिनेट मंत्रियों से अगले 100 दिन की कार्य योजना मांगी है।
प्रधानमंत्री ने कहा है कि 3 मार्च की कैबिनेट की बैठक में मंत्री अपनी-अपनी कार्य योजना को पेश करें। 21 फरवरी को मोदी सरकार की कैबिनेट की बैठक हुई थी, उसी बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों को 100 दिन की कार्य योजना देने का निर्देश दिया था।

विशेषज्ञों से चर्चा के बाद तैयार की जाएगी कार्य योजना
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंत्रियों को कहा गया है कि वे गहन विचार विमर्श और अनुभवी नौकरशाहों और विशेषज्ञों के साथ चर्चा के बाद इस कार्य योजना को तैयार करें। मंत्रियों को कहा गया है कि कार्य योजना अच्छी तरह से उल्लेखित होना चाहिए, जिस पर एक्शन लिया जा सके। कैबिनेट मंत्रियों से ये भी पूछा गया है कि अगले कार्यकाल में सरकार को किन क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा फोकस करना चाहिए, इसकी भी पहचान की जाए। 3 मार्च को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की यह आखिरी कैबिनेट बैठक होगी।

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चुनाव की तैयारी की भी बनेगी योजना
100 दिन की कार्य योजना के तहत भाजपा हर गांव और घर तक पहुंचेगी। पार्टी के गांव चलो अभियान के तहत सीएम, डिप्टी सीएम और सरकार के मंत्री गांवों में प्रवास कर रहे हैं। साथ ही दलित बस्तियों में भी प्रचार किया जा रहा है। 100 दिन की कार्य योजना के तहत सभी बूथों का सत्यापन किया जाएगा और पन्ना प्रमुख बना लिए जाएंगे। बीते दिनों बजट सत्र के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में विश्वास जताया था कि आगामी लोकसभा चुनाव में भी एनडीए की सरकार बनेगी और भाजपा अकेले 370 और एनडीए 400 सीटों पर जीत दर्ज करेगा। पीएम मोदी के बयान से साफ है कि भाजपा आगामी आम चुनाव में सत्ता हासिल करने को लेकर आश्वस्त हैं।

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हिमाचल के लोगों को मोदी सरकार का तोहफा, इस शहर से हरिद्वार के लिए मिलेगी सीधी ट्रेन सुविधा

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मोदी सरकार ने हिमाचल प्रदेश जाने वाले लोगों को एक नई सौगात दी है. केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और युवा एवं खेल मामलों के मंत्री अनुराग ठाकुर ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि अब हिमाचल से हरिद्वार तक सीधी ट्रेन चलाई जाएगी.

उन्होंने बताया कि ऊना हिमाचल से चल कर सहारनपुर जाने वाली ट्रेन अब हरिद्वार तक चलाई जाएगी.

हिमाचल वासियों को मोदी सरकार का तोहफा
अनुराग ठाकुर ने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार जताते हुए कहा कि इससे क्षेत्रवासियों को काफी लाभ मिलेगा और तीर्थाटन में बढ़ोतरी होगी. आगे उन्होंने कहा कि ऊना हिमाचल-सहारनपुर MEMU, जो ऊना से चल कर सहारनपुर तक जाती थी, उसके एक्सटेंशन की मंजूरी मिल गई है. अब ये ट्रेन ऊना से हरिद्वार तक चलाई जाएगी, जिससे यात्रियों को आवागमन की बड़ी सुविधा मिलेगी.

उन्होंने आगे कहा कि हिमाचल प्रदेश में रेल सेवाओं का विस्तार हो, इसके लिए मोदी सरकार नई ट्रेनें चलाने से लेकर जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट इत्यादि पर पूरी गंभीरता से काम कर रही है. वित्तवर्ष 2023-24 के लिए हिमाचल प्रदेश में रेलवे विस्तार के लिए 1838 करोड़ रुपए मंजूरी दी गई है.

मोदी सरकार द्वारा सामरिक महत्व की भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी रेल लाइन के लिए 1000 करोड़ ,चंडीगढ़-बद्दी रेललाइन को 450 करोड़ रुपये , नंगल- तलवाड़ा रेल लाइन के लिए 452 करोड़ रुपये वर्ष 2023-24 के बजट की मंजूरी दी गई है. रेल विस्तार के लिए 1838 करोड़ रुपये की यह मंजूरी यूपीए शासन काल के वर्ष 2009-2014 से 17 गुना ज्यादा है. वर्तमान में प्रदेश में 19556 रुपये करोड़ की 258 किलोमीटर की 4 परियोजनाओं पर काम जारी है.

केंद्रीय मंत्री ने दी जानकारी
अनुराग ठाकुर ने कहा कि उनके संसदीय क्षेत्र के ऊना जिले के गगरेट विधानसभा में वर्षों से मांग थी कि यहां के लोहारली खड्ड पर 500 मीटर लंबे डबल लेन की मंजूरी, दौलतपुर चौक रेलवे स्टेशन का लोकार्पण, अम्ब रेलवे स्टेशन तक रेल लाइन का विद्युतीकरण व फुटओवर ब्रिज का विस्तार, ऊना रेलवे स्टेशन पर दूसरे प्लेटफॉर्म एवं फुटओवर ब्रिज की मंजूरी,पुराने का विस्तार, नई रेलगड़ियां की मंजूरी व चुरारू तकराला अंबाला कैंट-दौलतपुर चौक पैसेंजर स्पेशल ट्रेन व रायमेहतपुर सहारनपुर-ऊना हिमाचल पैसेंजर एक्सप्रेस ट्रेन समेत प्रमुख गाड़ियों का स्टॉपेज पूरे हिमाचल के लिए मोदी सरकार की तरफ से बड़ा तोहफा है.

आगे जानकारी देते हुए अनुराग ठाकुर ने बताया कि ऊना ब्रॉडगेज रेललाइन से जुड़ा हुआ हिमाचल का एकमात्र जिला है. साल 1990 में पहली बार ट्रेन ऊना पहुंची थी. उन्होंने कहा कि साल 2014 से मार्च 2019 तक अम्ब-अन्दौरा, चिंतपूर्णी मार्ग व दौलतपुर चौक रेलवे स्टेशन तक का कार्य मोदी सरकार के समय मे पूरा हुआ है. आज ऊना व अम्ब अन्दौरा रेलवे स्टेशन से कुल 13 ट्रेनें इस जिले को देश के अलग भागों से जोड़ती हैं. साबरमती रेलवे स्टेशन के लिए भी ऊना से रोजाना ट्रेन चलती है.

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सबसे बड़े कुकर्मी बता अरविंद केजरीवाल ने एक सांस में लिए 13 नाम; सिसोदिया को बताया ‘धर्म’

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चंडीगढ़ मेयर चुनाव में सुप्रीम कोर्ट के जरिए आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को मिली जीत के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बुधवार को विधानसभा में जमकर गरजे। इस दौरान उन्होंने देश के कई नेताओं का नाम लेकर उन्हें सबसे बड़ा कुकर्मी बता डाला।

उन्होंने मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन को ‘धर्म’ बताते हुए भाजपा सांसद बृजभूषण, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा समेत कई नेताओं को कुकर्मी कहा।

केजरीवाल ने कहा, ‘आज चारों तरफ अधर्म का बोलबाला है। चारों तरफ इतना अधर्म हो गया है कि लोग बात करने लगे हैं कि ईमानदारी से कोई फायदा नहीं। देश में इतनी बड़े षड्यंत्र और कुकर्म चल रहे हैं। लोग देख रहे हैं कि अधर्म करने वालों को तरक्की हो रही है। देश में 75 साल के बाद गरीब बच्चों को अच्छी शिक्षा देने वाला देश के अंदर है, धर्म देश के अंदर है और देश की मां-बेटियों को छेड़ने वाला सत्ता का सुख भोग रहा है।’

केजरीवाल ने आगे कहा, ‘आज देश में मोहल्ला क्लीनिक बनाने वाला और गरीबों को दवा देने वाला सत्येंद्र जैन जेल के अंदर है। और चुन-चुन कर देश के सबसे बड़े कुकर्मी, सबसे भ्रष्टाचारी, हिमंत बिस्वा सरमा, शुभेंदु अधिकारी, मुकुल रॉय, नारायण राणे, भावना गावली, अशोक चव्हाण, यशवंत जाधव, यामिनी जाधव, छगन भुजबल, अजीत पवार, प्रफुल्ल पटेल, गोपाल कांडा… पता नहीं कितनी लंबी लिस्ट है। चुन-चुनके इस देश के सबसे कुकर्मी और सबसे भ्रष्ट लोगों को अपनी पार्टी में शामिल कराकर सत्ता का सुख भोग रहे हैं।’

सीजेआई की भगवान से तुलना
अरविंद केजरीवाल ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव पर फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की तारीफ करते हुए कहा कि ऐसा लगा जैसे चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की जुबान पर भगवान थे। उन्होंने कहा, ‘हम लोग अदालतों को मंदिर मानते हैं। न्याय भगवान देता है। इसलिए जज जब कुर्सी पर बैठकर फैसला सुनाता है तो कहा जाता है कि भगवान फैसला सुना रहा है। कल जो कुछ सुप्रीम कोर्ट में घटा वह कुछ ज्यादा बड़ा था। ऐसा लगा जैसे सुप्रीम कोर्ट में श्री कृष्ण मौजूद थे। ऐसा लगा जैसे चीफ जस्टिस के अंदर भगवान बोल रहे थे। ऐसा लगा जैसे चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की जुबान पर भगवान बैठे थे।’

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देश को पाकिस्तान बना दिया: केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने कि खुलेआम विधायक खरीदे जा रहे हैं और सरकारें गिराईं जा रही हैं। लोगों का विश्वास खत्म होता जा रहा है। उन्होंने चंडीगढ़ मेयर चुनाव की तुलाना पाकिस्तान के आम चुनाव से करते हुए कहा कि देश को पाकिस्तान बना दिया गया। उन्होंने कहा, ‘जो चंडीगढ़ में हुआ, एक अधिकारी ने वोट में गड़बड़ करके जीतने वाले को हरा दिया और हारने वालो को जिता दिया। पाकिस्तान में भी तो यही हुआ। इन लोगों ने हमारे देश को पाकिस्तान बना दिया। 75 साल में हमारे देश के 140 करोड़ के लोगों ने मेहनत करके हासिल किया था उसे एक झटके में खत्म कर दिया।’

चंडीगढ़ मेयर चुनाव में सुप्रीम कोर्ट के जरिए आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को मिली जीत के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बुधवार को विधानसभा में जमकर गरजे। इस दौरान उन्होंने देश के कई नेताओं का नाम लेकर उन्हें सबसे बड़ा कुकर्मी बता डाला।

उन्होंने मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन को ‘धर्म’ बताते हुए भाजपा सांसद बृजभूषण, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा समेत कई नेताओं को कुकर्मी कहा।

केजरीवाल ने कहा, ‘आज चारों तरफ अधर्म का बोलबाला है। चारों तरफ इतना अधर्म हो गया है कि लोग बात करने लगे हैं कि ईमानदारी से कोई फायदा नहीं। देश में इतनी बड़े षड्यंत्र और कुकर्म चल रहे हैं। लोग देख रहे हैं कि अधर्म करने वालों को तरक्की हो रही है। देश में 75 साल के बाद गरीब बच्चों को अच्छी शिक्षा देने वाला देश के अंदर है, धर्म देश के अंदर है और देश की मां-बेटियों को छेड़ने वाला सत्ता का सुख भोग रहा है।’

केजरीवाल ने आगे कहा, ‘आज देश में मोहल्ला क्लीनिक बनाने वाला और गरीबों को दवा देने वाला सत्येंद्र जैन जेल के अंदर है। और चुन-चुन कर देश के सबसे बड़े कुकर्मी, सबसे भ्रष्टाचारी, हिमंत बिस्वा सरमा, शुभेंदु अधिकारी, मुकुल रॉय, नारायण राणे, भावना गावली, अशोक चव्हाण, यशवंत जाधव, यामिनी जाधव, छगन भुजबल, अजीत पवार, प्रफुल्ल पटेल, गोपाल कांडा… पता नहीं कितनी लंबी लिस्ट है। चुन-चुनके इस देश के सबसे कुकर्मी और सबसे भ्रष्ट लोगों को अपनी पार्टी में शामिल कराकर सत्ता का सुख भोग रहे हैं।’

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